Coming generation suffers

Yuvish Singh
Sales Coordinator at Flatchat


There are many problems that arises due to child marriage be it health of the child or child bearer, education, or exploitation of the individual basic rights of that child who has been married to a person of his father’s age. Naive girls of age as small as 8 or 9 are being handed over to male counterparts of triple their age, to make a family, to give him children. Girls are forced to conceive children and such small girls could not take care of infant or even have the proper knowledge to do so which leads to health issues. The generation which comes is not educated because the mother and father was not that creates employment issues for them.

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बाल विवाह निरोधक कानून

शिम्पी यादव
कक्षा-8
के.जी.बी.वी.
जलालपुर.

बाल विवाह का अर्थ
कम उम्र में शादी करना।
जिनका विवाह 18 वर्ष से कम उम्र में हो जाता हैं। बाल विवाह कहलाता हैं। बाल विवाह करने सर लड़कियो को बहुत कष्ट सहन करना पड़ता हैं। बाल विवाह से निन्मलिखित हानियाँ होती हैं -

* बाल विवाह करने से लड़कियाँ जल्दी ही माँ बन जाती हैं।
* जिससे उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास रुक जाता हैं।
* शरीर व्याधियों से ग्रसित हो जाता हैं जिससे उनकी शिक्षा-दीक्षा बीच में ही समाप्त हो जाती हैं।
* अपने जीवन में कुछ नकार गुजरने वाली लड़कियो नके सपने चूर चूर हो जाते हैं।

बाल विवाह रोकने के उपाय:-
* बाल विवाह निरोधक कानून को सख्ती से लागु किया जाये।
* जन जागरूकता अभियान चलाया जाये।
* रैलियों एवं झाकियों द्वारा जन सन्देश फैलाया जाये।

जन जन तक संदेश पहुँचना हैं,
बाल विवाह मिटाना हैं।
हमको आगे बढ़ाना हैं,
बाल विवाह नहीं हैं।
दुनिया को दिखाएंग,
नई बहार लाएंगे।

जीवन की बर्बादी

मायावती
कक्षा -8
के.जी.बी.वी.
बभनी

कम उम्र में शादी,
जीवन की बर्बादी।

शादी हो सही उम्र पर,
सुखी रहोगी तभी जनमभर।

जल्दी जल्दी फल लगने से,
टूट जायेगा कच्चा पौधा।

कम उम्र में शादी से,
यही हाल लड़की का होगा।

मासूम बचपन

हर्षिता
के.जी. बी.वी
महाराजगंज

बाल विवाह
मासूम भोला स्वतंत्र और बेफिक्र बचपन हर किसी की किस्मत में नही होता, जिसका एक बड़ा कारण बाल विवाह भी है। इस पारस्परिक प्रथा को सम्पूर्ण रूप से समाप्त तो नहीं किया जा सकता परन्तु, कुछ सफल प्रयासों द्वारा इसमें कभी लायी जा सकती है। केवल कानून बनाने से कुछ नहीं होगा, उसके द्वारा तो हम लोगो में डर पैदा कर सकते है, और कमी भी ला सकते है। परन्तु कानून को सदैव सबूतों की जरुरत होती है, जो इस प्रकार की गतिविधियों में छुपा लिए जाते है, और सरकार कुछ नहीं कर पाती। इसकी रोकथाम के लिए जरुरी है लोगो को जागरूक करना- जैसे नुक्क्ड़ नाटक तथा गीतों का सहारा लेकर, सम्मेलनों के जरिये माँ बेटी को विवाह के दुष्परिणाम के सम्बन्ध में अवगत कराकर तथा अधिक से अधिक लोगो को इस प्रथा को रोकने के लिए भागीदार बनाकर। इसका सबसे अहम् कारण गरीबी भी है, जो छोटी उम्र और बेमेल विवाह कराती है इसके लिए भी सरकार लाडली योजना जैसी योजनाये लायी। जिसका लाभ लोगो को हुआ भी परन्तु कागजी कार्यवाही से बचने वाले लोगो ने फिर पैर पीछे खीच लिए तथा वह पीछे रह गये। इसके लिए कुछ समाजसेवी संगठनों को गरीब कन्याओं के विवाह के लिए कुछ धन राशि मुहैय्या कराना चाहिए तथा लाडली योजनाओं जैसी योजनाओं को क्रियविंत करने में सहयोग देना चाहिए। जहाँ इस प्रकार के विवाह अधिक होते हुए,वहाँ पर लड़कियों की संख्या, शिक्षा, उम्र आदि का ब्यौरा रखे, तथा समय- समय पर जाँच करें कि कही इस प्रकार किसी की जिंदगी के अनमोल पल ख़राब न हो रहें हों। बाल विवाह एक कानूनन अपराध है। इसके लिए बाल विवाह अधिनियम २००६ बनाया गया है, इस अधिनियम के अंतर्गत बताया गया है कि बाल विवाह करवाने वाले को दोषी पाया जायेगालड़की तथा उसके गहरा वालों को बताना चाहिए कि शादी कब करनी चाहिए जब वह शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत हो वह शादी का मतलब समझे तथा अपना निर्णय लेने लायक हो। इस तरह इन सभी बातो का पालन करके हम बाल विवह जैसी कुप्रथा पर रोक लगा सकते है तथा इससे होने वाले दुष्परिणामों से बच सकते है।

सवेरा

आशा सोनकर
के.जी.बी.वी
बरसठी

अभी अभी तो हुआ सवेरा धूप तनिक चढ़ जाने दो।
अभी ब्याहने की क्या जल्दी है थोडा पढ़ लिख तो जाने दो।।

कहते है की बचपन एक गीली मिटटी के घड़े के जैसा होता है, जिस- जिस रूप में ढाला जाये वो उसी रूप में ढल जाता है। सोचिये यदि इसी उम्र में यदि उनका विवाह कर दिया जाये तो उनका जीवन कैसा होगा। इतने प्रयासों के बाद भी हमारे देश में बाल विावह जैसी कुप्रथा का अंत नहीं हो प् रहा है। समाज को जागरूक हो कर इस सामाजिक बुराई को ख़त्म करने में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिये। बाल विवाह का सबसे बड़ा कारन अशिक्षा व् लिंगभेद है। आज भी लड़कियों को आर्थिक बोझ समझा जाता है। इस कुप्रथा के लिए अज्ञानता धार्मिक, सामाजिक मान्यताओं तथा रीति रिवाज मुख्यत: उत्तरदायी है। कारन चाहे जो भी हो परिणाम तो बच्चों को ही भुगतना पड़ता है। हमारे देश मी सबसे ख़राब स्थिति राजस्थान, बिहार, मध्य- प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल की है। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में ४७ प्रतिशत बालिकाओं का विवाह १८ वर्ष से पहले ही कर दिया जाता है तथा इनमें से २२ प्रतिशत बालिकाये १८ वर्ष के पूर्व ही माँ बन जाती है।
बाल विवाह को रोकने के लिये सर्वप्रथम १९२८ में शारदा एक्ट बनाया गया जिसमे जुर्माना व् कैद का प्रावधान किया गया। इसके पश्चात १९७८ में संसद द्वारा बाल विवाह निवारण कानून पारित किया गया तथा विवाह की आयु बालिका के लिए १८ वर्ष और बालक के लिए २१ वर्ष निर्धारित की गयी। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम २००६ को धारा ९ व् १० के तहत बाल विवाह करने वालो के लिए २ साल का कढोर कारावास तथा १ लाख रुपय के जुर्माने का प्रावधान है।

इस बाल विवाह को रोकने के लिए सर्कार जो नियम व् कानून बना रही है ये सब सानूं तब तक प्रभावी नहीं होगें जब तक हम सभी इसके प्रति संवेदनशील नहीं होगे।

मेरी आवाज

जया सिंह
के.जी.बी.वी.
बदलापुर

लड़की हैं घर की चिराग ,
18 के बाद शादी का करो विचार।
कम उम्र में ब्याही बिटिया,
जल्दी पकडे खटिया बिटिया।
बचपन में शादी करके,पिता जी लेते आजादी
मत सोचो सुकर्म हुआ हैं,हुई हैं बिटिया की बर्बादी।
उम्र में बच्ची को न दुल्हन हम बनायेंगे,
घर वाले बात न मानेंगे तो साथ साथ जेल जायेंगे।
कलियाँ बनकर बच्ची मेरी खुश्बू न महकायेगी।
बाल विवाह की बदबू बनकर जोर जोर चिलायेगी।

दुखद अंत

ज्योति सिंह
के.जी.बी वी
बी.के.टी

बाल विवाह उसे कहते जब लड़की की उम्र वर्ष और लड़के की उम्र २१ वर्ष से कम हो तो उसे बाल विवाह कहते है। बाल विवाह अपराध है की हमारे संविधान में भी लिखा है जो भी व्यक्ति इस कानून को तोड़ेगा उसे कड़ी से कड़ी सजा हो सकती है। बाल विवाह बाल विवाह कराने वाले व्यक्ति माता पिता रिश्तेदार तथा पंडित को दो वर्ष की कड़ी से कड़ी सजा हो जायेगी। बाल विवाह से लड़का एवं लड़की को बहुत परेशानी उठानी पड़ती है। बाल विवाह करने से शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं रहती है। कम उम्र में शादी होने पर वे अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं समझ पाते है। और लड़की भी माँ जल्दी जो की उसके लिए और उसके बच्चे दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है

बाल विवाह-शादी नहीं शोषण

विद्या कुमारी
के.जी.वी.बी.
डोभी

प्राचीन भारत में कई बुरी प्रथाएँ प्रचलित थी। उनमे से एक बुरी प्रथ थी बाल विवाह। लोग अपने छोटे छोटे बच्चो की शादी क्र देते हैं। यह प्रथा एक भयंकर रूप धारण कर चुकी हैं। इस प्रथा के कारण लड़कियाँ छोटी उम्र में ही माँ बन जाती थी। इसके कारण कई लड़किया छोटी उम्र में मर जाती हैं। इसके विरोध में कई छोटे छोटे संगठन बन गये और जगह जगह बाल विवाह के खिलाफ प्रचार करने लगे। इस प्रथा के और भी बहुत दुष्परिणाम थे। जाति प्रथा भी इसका मुख्य कारण था। ज्यादातर लोग अनपढ़ होते थे।आज भी भारत के कई राज्य में लड़कियो का विवाह समय से पहले कर दिया जाता हैं।
बाल विवाह शादी नहीं शोषण हैं। पाँच साल की बच्ची की शादी 25 साल के युवक दी जाती हैं तो और क्या हैं ,पर यह हो रहा हैं। दुनिया के कई कोनो में,भारत भी इससे अछुता नहीं हैं। एक अनुमान के अनुसार विश्वभर में हर वर्ष 10 से 12 मिलियन नाबालिक लड़कियो की शादी कर दी जाती हैं। भारत की बात करे तो यहाँ बाल विवाह पर कानूनन रोक हैं लेकिन रात के अँधेरे में आज भी हजारो बाल विवाह हो रहे हैं।